Physical Buttons Back in Cars: 2026 से कारों में फिर से फिजिकल बटन की वापसी हो रही है। Euro NCAP के नए नियम टचस्क्रीन को लेकर क्या कहते हैं, भारत पर इसका क्या असर होगा?
Physical Buttons Back in Cars: पिछले कुछ सालों में कारों के इंटीरियर पूरी तरह बदल चुके हैं। पहले जहां हर काम के लिए अलग-अलग बटन हुआ करते थे, वहीं अब लगभग सब कुछ एक बड़ी टचस्क्रीन में समा गया है। एसी कंट्रोल हो, म्यूजिक सिस्टम हो या फिर गाड़ी की सेटिंग, हर चीज स्क्रीन से कंट्रोल होने लगी। लेकिन अब यही टेक्नोलॉजी ड्राइवर की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। इसी वजह से 2026 से कारों में फिजिकल बटन की वापसी होने जा रही है।

- 1 Euro NCAP ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
- 2 Physical Buttons Back in Cars: 2026 से क्या होंगे नए नियम?
- 3 नियम धीरे-धीरे होंगे लागू
- 4 कौन सी कंपनियां पहले से तैयार हैं?
- 5 सिर्फ बटन ही नहीं, विज़िबिलिटी भी जरूरी
- 6 भारत में कहानी थोड़ी अलग
- 7 Bharat NCAP क्यों अलग है?
- 8 क्या भारत को भी Euro NCAP का रास्ता अपनाना चाहिए?
Euro NCAP ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
Euro NCAP यानी यूरोपीय न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यूरोप की सबसे बड़ी और भरोसेमंद कार सेफ्टी संस्था मानी जाती है। यह संस्था नई कारों को क्रैश टेस्ट और सेफ्टी फीचर्स के आधार पर स्टार रेटिंग देती है। हाल के वर्षों में Euro NCAP ने यह महसूस किया कि कारों में बढ़ती टचस्क्रीन ड्राइविंग के दौरान एक नई समस्या पैदा कर रही है। संस्था का साफ कहना है कि जब ड्राइवर बार-बार स्क्रीन की तरफ देखता है, तो उसका ध्यान सड़क से हट जाता है, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च में यह भी सामने आया कि टचस्क्रीन मेन्यू के अंदर जाकर जरूरी फंक्शन ढूंढना ड्राइवर को ज्यादा समय तक डिस्ट्रैक्ट करता है। इसी वजह से अब “टच-एवरीथिंग” ट्रेंड पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है।
Physical Buttons Back in Cars: 2026 से क्या होंगे नए नियम?
जनवरी 2026 से Euro NCAP के नए नियम लागू हो जाएंगे। अगर कोई कार निर्माता अपनी गाड़ी को 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दिलाना चाहता है, तो उसे कुछ जरूरी फंक्शन्स के लिए फिजिकल बटन देना अनिवार्य होगा। इनमें इंडिकेटर, हैजर्ड लाइट, वाइपर कंट्रोल, हॉर्न और SOS या इमरजेंसी कॉल सिस्टम शामिल हैं। अब ये सभी फीचर्स सिर्फ टचस्क्रीन के अंदर नहीं हो सकते। ड्राइवर को इन्हें बिना देखे, तुरंत और सहज तरीके से इस्तेमाल करने की सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि सड़क पर उसका फोकस बना रहे।
नियम धीरे-धीरे होंगे लागू
Euro NCAP ने यह बदलाव एक साथ लागू नहीं किया है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। साल 2026 में 60 प्रतिशत नियमों का पालन जरूरी होगा, 2027 में यह बढ़कर 70 प्रतिशत हो जाएगा और 2028 तक 80 प्रतिशत अनुपालन अनिवार्य कर दिया जाएगा। अगर कोई कार इन तय मानकों को पूरा नहीं करती है, तो उसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग नहीं मिलेगी, भले ही उसकी बॉडी स्ट्रक्चर कितनी ही मजबूत क्यों न हो।
कौन सी कंपनियां पहले से तैयार हैं?
कुछ ऑटो कंपनियां पहले ही इस बदलाव को समझ चुकी हैं और उसी दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।
वोक्सवैगन इस मामले में सबसे आगे नजर आ रही है। कंपनी अपनी आने वाली ID. Polo, जो ID.2all कॉन्सेप्ट पर आधारित होगी, उसमें फिर से फिजिकल बटन, रोटरी नॉब और पारंपरिक कंट्रोल्स वापस ला रही है। वोक्सवैगन ने पहले इस्तेमाल किए गए हैप्टिक स्लाइडर्स को हटाने का फैसला किया है क्योंकि कई ग्राहक उनसे परेशान थे। कंपनी का मानना है कि आकर्षक डिजाइन से ज्यादा जरूरी यह है कि ड्राइवर का ध्यान हर समय सड़क पर बना रहे।
सिर्फ बटन ही नहीं, विज़िबिलिटी भी जरूरी
Euro NCAP के नए नियम केवल फिजिकल बटन तक सीमित नहीं हैं। अब यह भी जरूरी कर दिया गया है कि गाड़ी से जुड़ी अहम जानकारियां जैसे स्पीड, सेफ्टी अलर्ट और ड्राइविंग असिस्ट सिस्टम से जुड़ा डेटा ड्राइवर की सीधी नजर के सामने मौजूद हो। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और हेड-अप डिस्प्ले यानी HUD का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है, ताकि ड्राइवर को बार-बार सेंटर स्क्रीन देखने की जरूरत न पड़े।
भारत में कहानी थोड़ी अलग
जहां यूरोप फिजिकल बटन की ओर लौट रहा है, वहीं भारत में फिलहाल इसका उल्टा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। देश की बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा अभी भी डिजिटल-फर्स्ट केबिन डिजाइन पर जोर दे रही हैं। आज की कई भारतीय कारों में डुअल या ट्रिपल स्क्रीन, टच-बेस्ड एसी कंट्रोल और बहुत कम फिजिकल बटन देखने को मिलते हैं। यहां ग्राहकों को ज्यादा टेक्नोलॉजी और फ्यूचरिस्टिक लुक आकर्षित कर रहा है।
Bharat NCAP क्यों अलग है?
भारत का Bharat NCAP यानी BNCAP फिलहाल मुख्य रूप से क्रैश सेफ्टी पर फोकस करता है। इसमें बॉडी स्ट्रक्चर, एयरबैग्स और टक्कर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि इंटरफेस सेफ्टी, जैसे फिजिकल बटन और टचस्क्रीन के बीच संतुलन, अभी इसके नियमों में पूरी तरह शामिल नहीं है। इसी कारण भारतीय कार निर्माता अभी भी आधुनिक लुक और बड़ी स्क्रीन को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
क्या भारत को भी Euro NCAP का रास्ता अपनाना चाहिए?
यह सवाल अब धीरे-धीरे चर्चा में आ रहा है। क्या हमें सिर्फ बड़ी चमचमाती स्क्रीन चाहिए या फिर ऐसे कंट्रोल्स जो ड्राइविंग के दौरान सुरक्षित और आसान हों? वैश्विक ट्रेंड यह संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में डिजाइन से ज्यादा सेफ्टी और उपयोगिता को प्राथमिकता दी जाएगी। संभव है कि भविष्य में भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ाए।
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टचस्क्रीन पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनका एकतरफा दबदबा जरूर कम हो सकता है। साल 2026 के बाद ऑटो इंडस्ट्री में एक नया संतुलन देखने को मिलेगा, जहां टेक्नोलॉजी और सेफ्टी दोनों को बराबर महत्व दिया जाएगा। आने वाले समय में यह कहना गलत नहीं होगा कि कभी पुराना माना जाने वाला फिजिकल बटन ही एक बार फिर नई टेक्नोलॉजी की पहचान बन सकता है।

