Hyundai investment in India: हुंडई मोटर ग्रुप ने भारत में 2032 तक 1.47 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना का ऐलान किया है। हुंडई के इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दिया जाएगा।
Hyundai investment in India: Plans and R&D
हुंडई मोटर ग्रुप की यह निवेश योजना भारत में उसके हुंडई और किआ ब्रांड के कारोबार को कवर करती है। कंपनी की योजना भारतीय बाजार में अपनी तकनीकी क्षमताओं और उत्पादन से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की है।
इस निवेश में करीब ₹6,650 करोड़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस राशि से भारत में एक इन-हाउस वाहन टेस्टिंग फैसिलिटी भी बनाई जाएगी। इसके अलावा, इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी की ऑटोमोटिव तकनीकों के विकास पर भी काम होगा।
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कंपनी को उम्मीद है कि इन योजनाओं से भारत में उसकी इंजीनियरिंग क्षमताओं और तकनीकी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। फिलहाल, कंपनी के ऑटोमोटिव और संबंधित कंपोनेंट व सर्विस कारोबार में करीब 24,000 लोग कार्यरत हैं।
हुंडई मोटर ग्रुप भारत में तकनीकी कौशल बढ़ाने के लिए चेन्नई में हुंडई एकेडमी फॉर टेक्निकल स्किल्स भी स्थापित करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय कर्मचारियों को ऑटोमोटिव क्षेत्र से जुड़ा व्यावसायिक प्रशिक्षण देना है।
Manufacturing Capacity and EV Plans
हुंडई मोटर ग्रुप की भारत में तीन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 14.25 लाख यूनिट है। इसमें हुंडई के चेन्नई प्लांट की क्षमता 8.24 लाख यूनिट और पुणे प्लांट की क्षमता 1.70 लाख यूनिट है। वहीं, किआ के अनंतपुर प्लांट की वार्षिक क्षमता 4.31 लाख यूनिट है।
निवेश योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी शामिल है। इसके साथ ही, ऑटोमोटिव फाइनेंसिंग और पुराने वाहनों की रीसाइक्लिंग से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
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हुंडई मोटर ग्रुप घरेलू टेक्नोलॉजी स्टार्टअप और मोबिलिटी सर्विस से जुड़ी कंपनियों में निवेश पर भी विचार करेगा। इन क्षेत्रों में वही अवसर प्राथमिकता पा सकते हैं, जो समूह के मुख्य कारोबार के अनुरूप हों।
भारत को हुंडई के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए एक अहम क्षेत्रीय केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है। इसके अलावा, कंपनी की सामाजिक पहलों में शिक्षा, कौशल विकास, कल्याण और दिव्यांगजनों को शामिल करने वाले कार्यक्रम भी शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, उसके प्रमुख सहयोगी संगठनों ने 2016 से भारत में इन कार्यक्रमों के लिए करीब ₹1,045 करोड़ का योगदान दिया है।
