Site icon Motor Mative

साउथ अफ्रीका की सड़कों पर भारत की धाक, बढ़ी भारतीय कारों की हिस्सेदारी

Indian cars in South Africa

2025 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली हर दूसरी कार भारतीय

लाइटस्टोन रिपोर्ट के अनुसार 2025 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली लगभग 50% कारों का भारतीय कनेक्शन रहा। Mahindra पिकअप, Tata और भारत से इम्पोर्टेड टोयोटा मॉडल्स ने मार्केट में मजबूत पकड़ बनाई।

Indian cars in South Africa: मार्केट इंटेलिजेंस फर्म ‘लाइटस्टोन’ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली लगभग आधी कारों का किसी न किसी रूप में भारत से संबंध रहा है। ये गाड़ियाँ या तो सीधे भारतीय कंपनियों जैसे Mahindra और Tata Motors की थीं, या फिर ग्लोबल ब्रांड्स द्वारा भारत से इम्पोर्ट की गई थीं। यह ट्रेंड दिखाता है कि भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अब ग्लोबल मार्केट में कितनी मजबूत हो चुकी है।

Indian cars in South Africa: पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भारतीय ब्रांड्स की मजबूत पकड़

डेटा के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भारतीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी लगभग 50% तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, 2025 के पहले 5 महीनों में दक्षिण अफ्रीका में इम्पोर्ट की गई 49% पैसेंजर कारें भारत से आईं। यह साफ संकेत है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी और कॉस्ट-इफेक्टिव प्रोडक्शन अब ग्लोबल खरीदारों को आकर्षित कर रहा है।

पिकअप ट्रक मार्केट में Mahindra का दबदबा

दक्षिण अफ्रीका के पिकअप ट्रक सेगमेंट में Mahindra पिकअप रेंज की डिमांड जबरदस्त रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mahindra अब इस सेगमेंट में लीडिंग पोजिशन पर पहुंच चुकी है, जो कंपनी की स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी और लोकल जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किए गए मॉडलों का नतीजा है।

जापानी ब्रांड्स भी भारत पर निर्भर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2024 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली जापानी ब्रांडेड लाइट व्हीकल्स में से 84% भारत से इम्पोर्ट की गई थीं, जबकि सिर्फ 10% गाड़ियाँ जापान में बनी थीं। इनमें टोयोटा स्टारलेट, स्टारलेट क्रॉस, विट्ज़ और अर्बन क्रूजर जैसे मॉडल शामिल हैं, जो असल में मारुति सुजुकी की भारत स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से आते हैं। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर वैश्विक भरोसे को दिखाता है।

चीन बनाम भारत: आंकड़े क्या कहते हैं?

चीन की कंपनियां जैसे हावल और चेरी भी दक्षिण अफ्रीका में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। 2024 में चीन से इम्पोर्ट की गई गाड़ियों की हिस्सेदारी 11% रही, जबकि भारत से आने वाली गाड़ियों का हिस्सा 36% था। वहीं, लोकल मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 37% रहा। इन आंकड़ों से साफ है कि भारत, दक्षिण अफ्रीका के ऑटो मार्केट में एक बेहद अहम सप्लायर बन चुका है।

यह भी पढ़ें- हुंडई क्रेटा ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड, हर दिन बिकीं 550 से ज्यादा SUVs

Exit mobile version